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Shivji ki Aarti

Shivji ki Aarti जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा । ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥ ॐ जय शिव…॥ एकानन चतुरानन पंचानन राजे । हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥ ॐ जय शिव…॥ दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे। त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥ ॐ जय शिव…॥ अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी । चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी ॥ ॐ जय शिव…॥ श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे । सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥ ॐ जय शिव…॥ कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता । जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता ॥ ॐ जय शिव…॥ ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका । प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका ॥ ॐ जय शिव…॥ काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी । नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी ॥ ॐ जय शिव…॥ त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे । कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे ॥ ॐ जय शिव…॥ जय शिव ओंकारा हर ॐ शिव ओंकारा| ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अद्धांगी धारा॥ ॐ जय शिव ओंकारा…॥ Shiv Ji Ki Aarti OM JAI SHIV OMKARA, PRABHU JAI SHIV OMKARA BRAHMA VISHNU SADA SHIV, ARDHANGII DHARA OM JAI SHIV OMKARA… EKANANA CHATURANAN PANCHANAN RAJE HANSANAN, GA...

Somvar Vrat Katha

  Somvar Vrat Katha एक नगर में एक बहुत अधिक धनवान साहूकार व्यक्ति रहता था, जिसके घर में धन की कोई कमी नहीं थी । परन्तु उसको एक बहुत बड़ा दुःख था कि कोई संतान नहीं थी। वह इसी चिन्ता में दिन-रात लगा रहता था । वह पुत्र की कामना के लिये प्रत्येक सोमवार को शिवजी का व्रत और पूजन किया करता था तथा सायंकाल को शिव मन्दिर में जाकर शिवजी के सामने दीपक जलाता था । उसके उस भक्तिभाव से प्रसन्न होकर एक बार माँ पार्वती जी ने भगवान शिवजी से कहा कि महाराज, यह साहुकार आप का अनन्य भक्त है और हमेशा ही आपका व्रत और पूजन बड़ी श्रद्धा से करता है। आपको इसकी मनोकामना अवश्य पूर्ण करनी चाहिए । शिवजी ने कहा- “हे पार्वती! यह संसार का नियम है । जो मनुष्य जैसा कर्म करता है उसे वैसा ही फल भोगना पढता है। पार्वती जी ने शिवजी से आग्रह करते हुए कहा “महाराज! जब यह आपका अनन्य भक्त है और इसको अगर किसी प्रकार का दुःख है तो उसको अवश्य दूर करना चाहिए क्योंकि आप तो अपने भक्तों पर दया करते हैं और उनके दुःखों को दूर करते हैं । यदि आप ऐसा नहीं करेंगे तो मनुष्य आपकी सेवा तथा व्रत क्यो करेंगे?” पार्वती जी का ऐसा आग्रह देख शिवजी बोल...

Karni Chalisa

  Karni Chalisa — दोहा — जय गणेश जय गज बदन, करण सुमंगल मूल। करहू कृपा निज दास पर, रहहू सदा अनूकूल॥ जय जननी जगदीश्वरी, कह कर बारम्बार। जगदम्बा करणी सुयश, वरणउ मति अनुसार ॥ — चौपाई — सूमिरौ जय जगदम्ब भवानी। महिमा अकथन जाय बखानी॥ 1॥ नमो नमो मेहाई करणी। नमो नमो अम्बे दुःख हरणी॥ 2॥ आदि शक्ति जगदम्बे माता। दुःख को हरणि सुख कि दाता॥ 3॥ निरंकार है ज्योति तुम्हारी। तिहूं लोक फैलि उजियारो॥ 4॥ जो जेहि रूप से ध्यान लगावे। मन वांछित सोई फल पावे॥ 5॥ धौलागढ़ में आप विराजो। सिंह सवारी सन्मुख साजो॥ 6॥ भैरो वीर रहे अगवानी। मारे असुर सकल अभिमानी॥ 7॥ ग्राम सुआप नाम सुखकारी। चारण वंश करणी अवतारी॥ 8॥ मुख मण्डल की सुन्दरताई। जाकी महिमा कही न जाई॥ 9॥ जब भक्तों ने सुमिरण कीन्हा। ताही समय अभय करि दीन्हा॥ 10॥ साहूकार की करी सहाई। डूबत जल में नाव बचाई ॥ 11॥ जब कान्हे न कुमति बिचारी। केहरि रूप धरयो महतारी॥ 12॥ मारयो ताहि एक छन मांई। जाकी कथा जगत में छाई॥ 13॥ नेड़ी जी शुभ धाम तुम्हारो। दर्शन करि मन होय सुखारो॥ 14॥ कर सौहै त्रिशूल विशाल। गल राजे पुष्प की माला॥ 15॥ शेखोजी पर किरपा कीन्ही। क्षुधा मिटाय अभय कर दीन्...

Maruti Stotra

  Maruti Stotra भीमरूपी महारुद्रा, वज्रहनुमान मारुती । वनारी अंजनीसूता रामदूता प्रभंजना ।।१।। महाबळी प्राणदाता, सकळां उठवी बळें । सौख्यकारी दुःखहारी, दुत वैष्णव गायका ।।२।। दीननाथा हरीरूपा, सुंदरा जगदांतरा । पाताळदेवताहंता, भव्यसिंदूरलेपना ।।३।। लोकनाथा जगन्नाथा, प्राणनाथा पुरातना । पुण्यवंता पुण्यशीला, पावना परितोषका ।।४।। ध्वजांगे उचली बाहो, आवेशें लोटला पुढें । काळाग्नी काळरुद्राग्नी, देखतां कांपती भयें ।।५।। ब्रह्मांडे माईलें नेणों, आवळे दंतपंगती । नेत्राग्नीं चालिल्या ज्वाळा, भ्रुकुटी ताठिल्या बळें ।।६।। पुच्छ ते मुरडिले माथा, किरीटी कुंडले बरीं । सुवर्ण कटी कांसोटी, घंटा किंकिणी नागरा ।।७।। ठकारे पर्वता ऐसा, नेटका सडपातळू । चपळांग पाहतां मोठे, महाविद्युल्लतेपरी ।।८।। कोटिच्या कोटि उड्डाणें, झेपावे उत्तरेकडे । मंद्राद्रीसारिखा द्रोणू, क्रोधें उत्पाटिला बळें ।।९।। आणिला मागुतीं नेला, आला गेला मनोगती । मनासी टाकिलें मागें, गतीसी तुळणा नसे ।।१०।। अणूपासोनि ब्रह्मांडाएवढा होत जातसे । तयासी तुळणा कोठे, मेरू मंदार धाकुटे ।।११।। ब्रह्मांडाभोवतें वेढें, वज्रपुच्छें करू शकें । तयासी तु...

Hanuman Chalisa In Malayalam

Hanuman Chalisa In Malayalam ഹനുമാൻ ചാലിസ ദോഹാ ശ്രീ ഗുരു ചരണ സരോജ രജ നിജമന മുകുര സുധാരി | വരണൗ രഘുവര വിമലയശ ജോ ദായക ഫലചാരി || ബുദ്ധിഹീന തനുജാനികൈ സുമിരൗ പവന കുമാര | ബല ബുദ്ധി വിദ്യാ ദേഹു മോഹി ഹരഹു കലേശ വികാര് || ജയ ഹനുമാന ജ്ഞാന ഗുണ സാഗര | ജയ കപീശ തിഹു ലോക ഉജാഗര || 1 || രാമദൂത അതുലിത ബലധാമാ | അംജനി പുത്ര പവനസുത നാമാ || 2 || മഹാവീര വിക്രമ ബജരങ്ഗീ | കുമതി നിവാര സുമതി കേ സങ്ഗീ ||3 || കംചന വരണ വിരാജ സുവേശാ | കാനന കുംഡല കുംചിത കേശാ || 4 || ഹാഥവജ്ര ഔ ധ്വജാ വിരാജൈ | കാംഥേ മൂംജ ജനേവൂ സാജൈ || 5|| ശംകര സുവന കേസരീ നന്ദന | തേജ പ്രതാപ മഹാജഗ വന്ദന || 6 || വിദ്യാവാന ഗുണീ അതി ചാതുര | രാമ കാജ കരിവേ കോ ആതുര || 7 || പ്രഭു ചരിത്ര സുനിവേ കോ രസിയാ | രാമലഖന സീതാ മന ബസിയാ || 8|| സൂക്ഷ്മ രൂപധരി സിയഹി ദിഖാവാ | വികട രൂപധരി ലംക ജരാവാ || 9 || ഭീമ രൂപധരി അസുര സംഹാരേ | രാമചംദ്ര കേ കാജ സംവാരേ || 10 || ലായ സംജീവന ലഖന ജിയായേ | ശ്രീ രഘുവീര ഹരഷി ഉരലായേ || 11 || രഘുപതി കീന്ഹീ ബഹുത ബഡായീ | തുമ മമ പ്രിയ ഭരതഹി സമ ഭായീ || 12 || സഹസ വദന തുമ്ഹരോ യശഗാവൈ | അസ കഹി ശ്രീപതി കണ്ഠ ലഗാവൈ || 13 || സനകാദിക ബ്രഹ്മാദി മുനീശാ | നാരദ ശാരദ സഹി...